ब्रेष्ट, समाधि लेख 1919 (Brecht’s “Epitaph 1919”)


सुर्ख गुलाब भी अब तो गायब हुआ
कहाँ है गिरा वह दिखता नहीं
गरीबों को उसने जीना सिखाया
अमीरों ने उसको तभी तो मिटाया
(1929)

वैकल्पिक अनुवाद:

सुर्ख रोज़ा भी अब तो गायब हुई
कहाँ है गिरी वह दिखती नहीं
गरीबों को उसने जीना सिखाया
अमीरों ने उसको तभी तो मिटाया