राजा का डर – पास्कल


महान फ्रांसीसी दार्शनिक और गणितज्ञ ब्लेज़ पास्कल की पुस्तक पौंसे (Pensees) के एक अनुच्छेद का अनुवाद

राजाओं को आदतन सिपाहियों, नगाड़ों, अफसरों और अन्य चीजों के साथ देखा जाता है जिनसे आदर और डर की भावनाएँ जागृत होती हैं – इस तथ्य का नतीजा यह होता है कि जब कभी-कभी वे अकेले और बिना किसी के साथ पाए जाते हैं, तो उनकी मुखाकृति ही काफी होती है प्रजा में आदर और भय पैदा करने के लिए, क्योंकि हम उनके व्यक्तित्व और परिचारक-वर्ग, जिसके साथ वे साधारणतया जोड़ कर देखे जाते हैं, के बीच मानसिक अंतर नहीं करते। और संसार जो नहीं जानता है कि यह आदत का असर है सोचता है कि यह किसी प्राकृतिक शक्ति से प्राप्त है, तभी तो इस तरह की कहावतें मिलती हैं – “उसके चेहरे पर ही दैविकता की छाप है”।