उत्साह


यानिस रित्सोस

जिस तरह चीज़े धीरे-धीरे खाली हो गयी हैं,
उसके पास करने को कुछ नहीं है। वह अकेला बैठता है,
अपने हाथों को देखता, नाख़ून – अजनबी लगते हैं –
बारबार अपनी ठुड्डी छूता है, कोई और ठुड्डी
लगती है, बिलकुल ही अजनबी,
इतनी नितांत और स्वभावतः अजनबी कि उसे खुद
इसके नएपन में मजा आने लगा है।

The Banking Crisis


Your sweat measured
Barrelled at the banks of the market
To be thrown in the deluge
In the hope of a golden axe golden tears

But the giving spirit
Suffers Midas’ gluttony
Stands immobile
Amidst waves
Lashing the isle of liberty.

बीमारी सच बोलने की


वे हैं तो सब कुछ मुमकिन है
क्योंकि इन सब के बाद भी वे हैं
और तुम सोचते हो उनको नंगा
और अपने आपको बालक

जो कि तुम बिलकुल हो अबोध
अपने ख्यालों की दुनिया की
सच्चाई को ही सच्चाई मानते
और पनचक्की पर वार करते हो

ये बीमारी सच बोलने की
बेवकूफी है कि तुम्हें कौन सुनेगा
जो सुनते हैं वे जानते हैं
वे तुम्हीं हो अपने आपको सुनते

मगर यह सच उनका नहीं है
जिन्हें तुम सुनाना चाहते हो
बताना चाहते हो सच्चा सच
आंकड़ों में ढूंढ़ते हो जिन्हें

वे अपना सच अपनी रोज़
की थकान में गुज़ार देते हैं
तुम्हारे आँकड़े उस कशमकश
के नतीजों को मापते हैं

मशीनों से पसीनों की जूझ
व उनके गंध तक नहीं पहुँचते
जहाँ खून और तेल के मिलाप से
अजीब सा नशा फैल जाता है

होली ही होली है


गिरा है खून उस तरफ
इस तरफ रंगीनी है
घरों में मातम है
दिलों में संगीनी है
वहाँ की खून की होली
इन्हें रंगोली है

समय का पहिया है
आज ये है
तो कल वो है
आज भीड़ इनकी
तो कल उनकी
टोली है

हर रोज़ कहीं दिवाली है
जो नहीं तो फिर
होली है

२७/०९/१९

परिवर्तन: यानिस रित्सोस


यानिस रित्सोस (1909-1990) यूनान के महान क्रांतिकारी कवि थे।

जिसको तुम शांतिप्रियता या अनुशासन, दयालुता या उदासीनता कहते हो,
जिसको तुम दाँत दबाए बंद मुँह बताते हो,
जो मुँह की प्यारी चुप्पी दिखती है, दबे दाँतों को छुपाती,
वह उपयोगी हथौड़े के नीचे धातु की केवल धैर्यपूर्ण सहनशीलता है,
भयानक हथौड़े के नीचे – तुम्हारी चेतना है
कि तुम निराकारता से आकार की ओर बढ़ रहे हो।

आज़ादी


तेज हवाएँ पत्ते झाड़ते हैं बंधनों को
जो बाँधते हैं उन्हें तने हुए वृक्षों से
काठो-र सुरक्षा तोड़ कर क्षणिक
उड़ान भरने की असुरक्षित आज़ादी

यह क्या है उत्सव है या शहादत है
या कोई अचानक उठती बगावत है
विप्लव का आगाज़ है नवीनता का
प्रसव बेशक यह व्यवस्था की बर्बादी

मिड्ल क्लास ब्लूज़ (मध्यम वर्ग का तराना)


जर्मन कवि हांस मागनुस एंजेंसबेर्गर की कविता “Middle Class Blues” का अनुवाद

हम शिकायत नहीं कर सकते।
हम काम से नहीं निकाले गए हैं।
हम तृप्त हैं।
हम खाते हैं।

घास उगती है,
सामाजिक उत्पाद,
नाख़ून,
अतीत।

सडकें खाली हैं।
सौदे हो चुके हैं।
सायरन शांत हैं।
ये सब अतीत हो जाएंगे।

मृतकों ने अपना वसीयतनामा बना लिया।
बारिश मुसलाधार हो चली।
युद्ध की घोषणा अभी नहीं हुई।
इसकी कोई जल्दी नहीं है।

हम घास खाते हैं।
हम सामाजिक उत्पाद खाते हैं।
हम नाख़ून खाते हैं।
हम अतीत खाते हैं।

हमें छुपाने को कुछ भी नहीं है।
हमें कोई कमी नहीं है ।
हमें कहने को कुछ नहीं है।
हमारे पास है।

घड़ी तैयार है।
बिल चुकता हो चुके हैं।
बर्तन धुल चुके हैं ।
अंतिम बस रवाना हो रही है।

वो खाली है।

हम शिकायत नहीं कर सकते।

हमें किस चीज़ का इंतजार है?