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समुन्दर के साथ (रूमी के सहारे: १)


साथ रहना, डूबना मत मछलियों जैसे
कहीं नींद में तुम।
बहते रहो रात भर समुन्दर के साथ,
मत बिखरना बारिशों की तरह।

जो बसंत हम खोजते हैं
यहीं कहीं छुपा है धुंध में।
देखो रात जगमगाती साथ चलती है,
दीपक अभी भी जागता है सोने की अपनी थाली में।

कहीं ज़मीन के दरारों में बिखरे पारों की तरह मत खोना।
जब चाँद नज़र आए तब देखना तुम।

तुम्हारा ही प्रतिरूप है


वह कहीं का नहीं है क्योंकि वह सब जगह है
वह कहीं का नहीं है इसीलिए वह सब जगह है
वह ऊपर और नीचे दोनों जगह अपनी टांगें जमाए हुए है
उसका यही योग श्रृंखलाओं में बांधे हुए है तुमको और उनको

उसकी विद्युत गति तुम्हें उसकी अगति और रूढ़िता लगती है
उसके चाल और पहनावे को ही देखते हो तुम
और उनमें तुम्हें असामंजस्य दिखता है
उसके परिष्कृत भोंडेपन में वैमनस्य दिखता है
उसे देख वैमनस्य जगता है

मगर वही है जो नीचे की आकांक्षाओं की घातकता को जानता है
और वही है जो उसको अपने में भर लेता है
एक मिसाइल की तरह एक ही छलांग में सीमा पार उसे छोड़ देता है
और कभी सीमा के अंदर भी इसकी जरूरत होती है

दूर विस्फोट का हल्का असर तुम पर भी पड़ता ही होगा
और तुम दुबक जाते हो
ध्यान नहीं है तुम्हें
तुम्हारी बौद्धिकता की गगनचुम्बी इमारतों की नींव अब भी नीचे ज़मीन के अंदर ही होती है
उसने तुम्हें बचाया है

उसने तुम्हें बचाया है
क्योंकि उसको तुम्हीं से प्यार है
वह तुममें से एक होना चाहता है
वह तुम्हारे भय और नीचे उभरते आक्रोश का औसत है
वह औसत आदमी की दबी आकांक्षाओं की मूर्ति है
वह तुम्हारा ही प्रतिरूप है
पहचानो उसे!

उत्साह


यानिस रित्सोस

जिस तरह चीज़े धीरे-धीरे खाली हो गयी हैं,
उसके पास करने को कुछ नहीं है। वह अकेला बैठता है,
अपने हाथों को देखता, नाख़ून – अजनबी लगते हैं –
बारबार अपनी ठुड्डी छूता है, कोई और ठुड्डी
लगती है, बिलकुल ही अजनबी,
इतनी नितांत और स्वभावतः अजनबी कि उसे खुद
इसके नएपन में मजा आने लगा है।

The Banking Crisis


Your sweat measured
Barrelled at the banks of the market
To be thrown in the deluge
In the hope of a golden axe golden tears

But the giving spirit
Suffers Midas’ gluttony
Stands immobile
Amidst waves
Lashing the isle of liberty.

बीमारी सच बोलने की


वे हैं तो सब कुछ मुमकिन है
क्योंकि इन सब के बाद भी वे हैं
और तुम सोचते हो उनको नंगा
और अपने आपको बालक

जो कि तुम बिलकुल हो अबोध
अपने ख्यालों की दुनिया की
सच्चाई को ही सच्चाई मानते
और पनचक्की पर वार करते हो

ये बीमारी सच बोलने की
बेवकूफी है कि तुम्हें कौन सुनेगा
जो सुनते हैं वे जानते हैं
वे तुम्हीं हो अपने आपको सुनते

मगर यह सच उनका नहीं है
जिन्हें तुम सुनाना चाहते हो
बताना चाहते हो सच्चा सच
आंकड़ों में ढूंढ़ते हो जिन्हें

वे अपना सच अपनी रोज़
की थकान में गुज़ार देते हैं
तुम्हारे आँकड़े उस कशमकश
के नतीजों को मापते हैं

मशीनों से पसीनों की जूझ
व उनके गंध तक नहीं पहुँचते
जहाँ खून और तेल के मिलाप से
अजीब सा नशा फैल जाता है

होली ही होली है


गिरा है खून उस तरफ
इस तरफ रंगीनी है
घरों में मातम है
दिलों में संगीनी है
वहाँ की खून की होली
इन्हें रंगोली है

समय का पहिया है
आज ये है
तो कल वो है
आज भीड़ इनकी
तो कल उनकी
टोली है

हर रोज़ कहीं दिवाली है
जो नहीं तो फिर
होली है

२७/०९/१९

परिवर्तन: यानिस रित्सोस


यानिस रित्सोस (1909-1990) यूनान के महान क्रांतिकारी कवि थे।

जिसको तुम शांतिप्रियता या अनुशासन, दयालुता या उदासीनता कहते हो,
जिसको तुम दाँत दबाए बंद मुँह बताते हो,
जो मुँह की प्यारी चुप्पी दिखती है, दबे दाँतों को छुपाती,
वह उपयोगी हथौड़े के नीचे धातु की केवल धैर्यपूर्ण सहनशीलता है,
भयानक हथौड़े के नीचे – तुम्हारी चेतना है
कि तुम निराकारता से आकार की ओर बढ़ रहे हो।

आज़ादी


तेज हवाएँ पत्ते झाड़ते हैं बंधनों को
जो बाँधते हैं उन्हें तने हुए वृक्षों से
काठो-र सुरक्षा तोड़ कर क्षणिक
उड़ान भरने की असुरक्षित आज़ादी

यह क्या है उत्सव है या शहादत है
या कोई अचानक उठती बगावत है
विप्लव का आगाज़ है नवीनता का
प्रसव बेशक यह व्यवस्था की बर्बादी

कविताओं में कंकड़


कविताओं में वे भी हैं जो कहे से इतर हैं
यानी अनकही चीजें जिन्हें आप कहते नहीं
मगर उनके नहीं कहने में ही वे आ जाते हैं

हम जो कहते हैं वे तो बस बिंदु हैं
जिन्हें ध्यान रखकर दिशाओं का आकलन करते हैं

या फिर रेखाएं हैं जिनसे हम
सच्चाई की ज़मीन पाटते हैं
उसे कहने लायक बनाते हैं

या फिर ढांचे हैं जिनमें हम सच्चाई को बांधते हैं
और बताते हैं कि यही सच्चाई है और कुछ भी नहीं

मगर नहीं वे मामूली कंकड़ हैं
जिन्हें हम फेंक दें और इंतजार करें
आम के गिरने का किसी पक्षी के उड़ने का
ठहरे हुए पानी में सिहरन का
बहते हुए पानी में बहने का
पत्तों के झुरमुट से चाँद के निकलने का

सच्चाई नहीं
सच्चाई के बदलने का

A Prayer to the Overman


O supreme lord on earth
We have instituted small temples
Of you
In a billion hearts

In their daily powerlessness
In the dried wells of their bodies and spirits
They have found
An immense will to survive and revive
By a single drop of your precious virility

Look how they tend and attend to
Your instrument of power

Milk and what not

They have erected it for you
And themselves

And they bathe in its sweat
And musk

Frenzied
Cameras, lights
Chants, blood
And fire

Silence

And a blast – a shower
Of power
And desire

The purgatory

Between life and death
The lost sense of physicality
All that is solid melts away
An indifference of pain and pleasure

Lo! Rises the mark, the symbol
The flag
The anthem
And the stream of oneness

Oh Lord!