कलियुग का महामानव


अब सब कुछ ऐतिहासिक है
क्योंकि मैं ही इतिहास हूँ
अब तक समय प्यासा था
और मैं उसकी प्यास हूँ

झाँक लो मेरे मुंह के अंदर
अतीत की सड़ाँध वर्तमान
की कायरता और भविष्य से
सरपट दौड़ता आता तूफान

सब कुछ है मुझमें मुझसे ही
पाती है ऊर्जा भौतिक रूप
सब मेरी ही माया है बस
मैं ही हूँ जो बिल्कुल अनूप

जो पूछते हैं मुझसे मेरा नाम
कर दिया है तय उनका काम
या वे मुझमें खुद ही समा जाएँ
या उनके सत्य का होगा राम नाम

कलियुग का हूँ महामानव मैं
पश्चात क्या पश्चात्ताप क्या
युगों का मैं अंत हूँ अनंत हूँ
यही होना था तो विलाप क्या