मुश्किल है जीवन की राह


मैंने खड़ी पहाड़ों और ऊंची चोटियों को लांघा है,
मुझे क्या इल्म होगा तराइयों की मुश्किलातों का?
पहाड़ों में बाघ के सामने से महफूज़ गुज़रा हूँ,
तराइयों में मिले इंसां और कैदखाने पहुंचा हूँ।

हो ची मिन्ह (19 मई 1890 – 2 सितंबर 1969)