छायाओं की दुनिया


जर्मन कवि हंस मागनुस एंजेंसबेर्गर की कविता “Schattenreich” का अनुवाद

यहाँ अब भी मुझे एक जगह दिखती है,
एक खाली जगह,
यहाँ छाया में ।

यह छाया,
बिकाऊ नहीं है ।

समुन्दर भी
शायद छाया बनाता है,
समय भी ।

छायाओं की लड़ाइयाँ
खेल हैं:
कोई छाया
किसी दूसरे की रोशनी में नहीं रहती।

जो छाया में जीते हैं,
उन्हें मारना मुश्किल है।

कुछ क्षण के लिए
मैं अपनी छाया से बाहर निकलता हूँ,
कुछ क्षण के लिए।

जो रोशनी देखना चाहते हैं
उसको उसके रूप में
उन्हें आश्रय लेना होगा
छाया का।

छाया
सूर्य से भी तेज़:
आज़ादी की ठंडी छाया।

छाया में पूरी तरह
मेरी छाया गायब हो जाती है।

१०

छाया में
अभी भी जगह है।