मुमकिन


खोए हुए हैं रास्ते हम किनारे पर खड़े हैं
इंतज़ार है कि राहगीर गुज़रेगा कोई तो
उम्मीद में बैठे हैं कि चमकेगा सितारा
आएगा फलक पर नज़र निशान कोई तो

हम हर वक्त अपने अंत के साथ खड़े हैं
जैसे धरती फटे अभी हम समा जाएँ
मौत साये की तरह हमारे साथ खड़ी है
असीम छाँव है कभी भी समा जाएँ

रात गुज़रे ओढ़ चादर हमारी शय्या
क़फ़न बन जाए तो क्या मुश्किल
जिस में खोए हैं रात भर वो दुनिया
अपनी ही हो जाए तो क्या मुश्किल

हमने कितनों को गुज़रते हुए देखा है
हम भी इस रास्ते गुज़रें ये है मुमकिन
सबके पाँव छपे हैं निशान बाकी है
हम भी उन तक पहुंच जाएँ है मुमकिन